ओड चे किस्‍से

हेकवारी हेक चीकू नावां चे सस्ये हुत्‍ते। हेक डियो ऊं आपणी घरली लारे बाग मां घुमते फिर्रे ले। ओच्‍ची घरली ने बाग मां बणा पे पकले आल्‍ले मीठे-मीठे फल डेखले ता विच्‍चे मुंहा मूं पाणी आऊं लागती गेल्‍ले। विणे चीकू नूं फल पटती आवणे कल्‍ले कहले। चीकू ब़ोडला हा बाग हेके भेडिये

हेक राजा खोद्‍द नूं मोल्ख चा सारा मूं समझदार राजा समझता। ओ डेखणा चहावे ला की ओच्‍ची सोच सही छे या गल्त, कां ये मोल्ख मां कुई ओ कन्‍नू समझदार छे या कोन्हीं। हा सोचती कन्‍न ओण्हे आपणे सारे नूं भेल्‍ले करले ता वा कन्‍नू पूछले की माये मन मां का छे !

हा किस्‍सा हेक घणी सोहणी अस्तरी चां छे, विच्‍चे ना परमादेवी हुत्‍ते। वा हेके इस्कूल मां मेडम हुत्‍ती। ओ बेल्हे सारे देस मां छुवाछूत ची बिमारी फेड़ली आल्‍ली हुत्‍ती। परमादेवी इस्कूल मां पढ़ाऊं जत्‍ती मगर इस्कूल मां आल्‍ले ब़ाला नूं हाथ ना लाती। ब़ाला नूं कहती की तम्हीं म

हेक महान राजा हुत्‍ता ओच्‍चे ना रामधन हुत्‍ते। लोका ची सेवा करणा ओच्‍चा धरम हुत्‍ता। ओच्‍ची जनता वी ओन्हूं राम आल्‍ली कन्‍न पुजती। राजा सारा ची बेन्‍न लालच चे सेवा करता। चाहे वा जनता ओच्‍चे देस ची हो या कुई नेरे देस ची। ओच्‍चे ये सुभा चे कारण नेरे देस चे लोक वी ओच्‍ची प

हेक गुरू हुत्‍ता जक्‍को आपणे चेला लारे घणा पियार करता। आपणे चेला चे गोण ते कमिया चा पता लाती कन्‍न वान्हूं भविसय कल्‍ले तियार करता। ओच्‍चा हेको लक्सय हुत्‍ता की ओच्‍चा हर चेला जिन्दगी मां हिम्‍मती लारे उगते बधो। ओच्‍चे सारे चेला मूं हेक चेला घणा भोला ते सुभा चा सीधा ह

हेक डियो अकबर ते बीरबल सिकार कल्‍ले गेल्‍ले। उट्‍ठे सिकार करते बेल्हे अकबर ची आंगली बढ़ीली गेल्‍ली। अकबर नूं घणा रड़ा हुवे पलता ला। इतने मां बीरबल ब़ोड़ला, “ कुई बात नी महाराज, जक्‍को हुवे आच्छे कल्‍ले हुवे।” अकबर नूं बीरबल ची बात पे घणा घुस्‍सा आल्‍ला ता ओण्हे आपणे सेन

हेक नगर मां हेक अमीर सेठ रहता। ओ कन्‍नू घणा पेसा होणे चे बाद वी हमेसा डुक्‍खी रहता। हेक डियो घणा पिरोसान हुत्‍ती कन्‍न हेक बाबे कन्‍नू गेल्‍ला ते आपणी सारी पिरोसानी बाबे नूं ब़ावड़ली। ओण्हे सेठ ची बात बडे गोर लारे सुणली ता ओन्हूं कहले की काल इसे बेल्हे बलति तू मां कन्

हेक घणे सोहणे गां हुत्‍ते। ओच्‍चे चारों मेर पहाड़ हुत्‍ते। पहाड़ा भांसू हेक सेर रहता। सेर जिसे बेल्हे दहाड़ता गांवा आल्‍ले डर्र कन्‍नू कांपू लागती जते। पाला घणा हुत्‍ता ता सारी जगा बरफ जमली पलती ली। सेर घणा भुक्‍खा हुत्‍ता। ओण्हे घणा डिया कन्‍नू कस्‍सा कोन्हीं खाले हुत्

हेक डियो किरसन भगवान ते अरजुन घुमणे कल्‍ले निकड़ले ता वे बहारले लोक चे बन्दा नू डेखते फिर्री ले। ओ बेल्हे वाची दीद हेक हलवाई ची दुकान पे पड़ली। हलवाई बचले आल्‍ले खाणे आपणी दुकान लारे भुकाती नाखता। ओ खाणे नूं डेखती कन्‍न हेक कुत्ता बार-बार खाणे कल्‍ले आवे मगर हलवाई ओन्हू

हेक डियो हेक गरीब कुणबे चे छोर नोकरी सोधणे कल्‍ले रेलगड्‍डी मां जाये पलते ले। ओच्‍चे घरे कड्‍डी-मड्‍डी भाजी चढ़ती, ए सांगू ओण्हे रस्ते मां खाणे कल्‍ले हेको रोटिया चलिया जत्‍ती। आधा पन्ध निकलणे चे बाद ओन्हूं भोक्‍ख लागती गेल्‍ली ता उ आपणे टिप्‍पणा मूं रोटिया काढ़ती कन्‍न

पंचांग

वरणमाला केदा

भासा जागरूकता पोस्टर