हेक गुवाल हुत्ता। ओ कन्नू घणिया सारिया गया हुतिया। ओ रोज गया नूं पहाड़ पे चराऊं जत्ता। वाचे मूं हेक्की गई ना पुनयकोटी हुत्ते। जक्को आपणे ब़ाला लारे घणा पियार करती। आत्थणा चे वा जल्दी आपणे घरे आती जत्ती। ओ पहाड़ा मां हेक सेर वी रहता। हेक वारी सेर नूं घणी डिय्हे कसा खाणे कल्ले कोन्हीं लाभले। हेक डियो ओण्हे पुनयकोटी गई नू रोकती कन्ने कहले, में तन्नू आज खायी। पुनयकोटी गई ने हाथ जोड़ती कन्न सेर नूं कहले, मन्नू हिम्मा तू घरे जाऊ डे। में आपणे ब़ाला नूं डूध पिलाती कन्न खोद्द ही दुद्धे कन्नू आती जायी। पहले ता सेर ने विच्ची बात नी मनली। पर जिसे बेल्हे गई ने सेर नूं बचन डिल्ला ता सेर ने गई नूं जाओ डिल्ले।
डूध पिलाते बेल्हे गई ने सारा किस्सा आपणे ब़ाला नूं सुणाला ते विच्चे आंखिया मूं हिंजुवे आऊ लागती गेल्ली। ब़हारू आते बेल्हे विणे आपणे ब़ाला नूं कहले बडे अराम लारे रहले करा। बलति विणे नेरे गई नूं कहले, ब़हेण माये ब़ाला नूं आपणे समझती कन्न राखजा। पुनयकोटी गई ने सेर नूं कहले, हा हिम्मा मन्नू खाती जा। सेर ने सोचले इतनी आच्छी गई नूं आपणा अहार बणावणा घणी बुरी बात छे। हा सोचती कन्न ओण्हे गई नूं छोड़ती डिल्ले।