हेक वारी हेक बारासींगा जोहड़ मां पाणी पीये पलता ला। ओण्हे पाणिया मां आपणी पच्‍छांवे डेखली ते सोचू लागती गेल्‍ला की मायी सींगे कितनी सोहणी छी पर माये पग कितने पतले-पतूंग ते बेकार छी।ओ बेल्हे ओच्‍चे कान मां सेर चे दहाड़ने ची अवाज गुंजली। बारासींगा डर्रा कन्‍नू दरोड़ती पल्‍ला। ओण्हे भांसू डेखले ते सेर ओच्‍चे भांसू लागला फिर्रे ला। दरोड़ती-दरोड़ती कन्‍न ओ घणी दूर आती गेल्‍ला ते आंगू घणा जंगलात हुत्‍ता। अचानचक ओच्‍ची सींगे बणा चे टाणिया मां अड़ती गेल्‍ली। बारासींगे ने आपणी सींगे छुड़ावणे ची घणी कोसिस करली पर ओ नीं छुड़ा सगला।ओण्हे आपणे मन मां सोचले की में आपणे पग नूं कोस्‍से पलता ला पर माये पग ने मायी घणी मदद करली। मगर जिसे सिंगा ची में परसन्सा करे पलता ला। वे सींगे मायी मोत चा कारण बणने आल्‍ली छी। इतने मां सेर उट्‍ठे पुजती गेल्‍ला ते बारासींगे नूं मारती नाखले।

पंचांग

वरणमाला केदा

भासा जागरूकता पोस्टर